पंजाब -(मनदीप कौर)- पंजाब में सरकारी कर्मचारियों का आंदोलन: पंजाब में अपनी लंबित मांगों को लेकर सरकारी कर्मचारियों का विरोध प्रदर्शन तेज हो गया है। मंगलवार को प्रदेशभर में सरकारी कर्मचारी कामकाज ठप रखकर अपनी मांगों के समर्थन में प्रदर्शन करेंगे। कर्मचारियों की प्रमुख मांगों में लंबित डीए जारी करना, पुरानी पेंशन योजना बहाल करना और अन्य कर्मचारी हित से जुड़े मुद्दे शामिल हैं।
मनिस्ट्रीयल स्टाफ रहेगा सामूहिक छुट्टी पर

मंगलवार को पंजाब का मनिस्ट्रीयल स्टाफ एक दिन की सामूहिक छुट्टी पर रहेगा। इससे पहले 27 अगस्त को भी कर्मचारियों ने सामूहिक छुट्टी लेकर सरकार के खिलाफ अपने संघर्ष को तेज करने का संकेत दिया था।
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कर्मचारियों की ओर से प्रदेश के अलग-अलग जिलों में डीसी कार्यालयों, डायरेक्टोरेट्स और सचिवालयों में विरोध प्रदर्शन किए जाएंगे। एक दिन की कलम छोड़ हड़ताल के बाद विभिन्न कर्मचारी यूनियनों की संयुक्त एक्शन कमेटी बैठक कर आंदोलन की अगली रणनीति तय करेगी।
विधायक और मंत्रियों के आवास घेरने की तैयारी
कर्मचारी नेताओं के मुताबिक आंदोलन के अगले चरण में विधायकों और मंत्रियों के आवासों का घेराव किया जा सकता है। इस बीच कर्मचारी नेताओं के तबादले के आदेश जारी किए जाने का मुद्दा भी सामने आया है।
कर्मचारी नेताओं ने स्पष्ट किया है कि नेताओं के तबादलों से आंदोलन प्रभावित नहीं होगा। उनका कहना है कि कर्मचारी अपनी मांगों और अधिकारों के लिए एकजुट होकर संघर्ष कर रहे हैं।
85 हजार कर्मचारियों के DA को लेकर सरकार का प्रस्ताव
इसी बीच पंजाब सरकार की ओर से 17 जुलाई 2020 के बाद भर्ती किए गए करीब 85,000 कर्मचारियों के डीए को 42 प्रतिशत से बढ़ाकर 60 प्रतिशत करने का प्रस्ताव सामने आया है। ये कर्मचारी केंद्रीय वेतनमान के तहत आते हैं।
बताया जा रहा है कि इस प्रस्ताव को लागू करने पर पंजाब सरकार पर करीब 900 करोड़ रुपये सालाना का अतिरिक्त वित्तीय बोझ पड़ सकता है।
कैबिनेट सब-कमेटी ने तैयार किया प्रस्ताव
जानकारी के अनुसार डीए बढ़ाने का प्रस्ताव कैबिनेट सब-कमेटी की ओर से तैयार किया गया है और अब यह मुख्यमंत्री स्तर पर अंतिम मंजूरी के अधीन है।
हालांकि कर्मचारी नेताओं ने सरकार के इस प्रस्ताव पर सवाल उठाए हैं। उनका आरोप है कि अलग-अलग वर्गों के कर्मचारियों के लिए अलग फैसले लेकर आंदोलन को कमजोर और कर्मचारियों को बांटने की कोशिश की जा रही है।
3.25 लाख कर्मचारियों और 4 लाख पेंशनरों की लड़ाई: कर्मचारी नेता
पीएसएस ऑफिसर्स एसोसिएशन के प्रदेश अध्यक्ष मनजीत सिंह रंधावा ने कहा कि यह संघर्ष करीब 3.25 लाख कर्मचारियों और 4 लाख पेंशनरों का है। उन्होंने दावा किया कि कर्मचारी पूरी तरह एकजुट हैं।
उन्होंने यह भी कहा कि सरकार जिन 85 हजार कर्मचारियों को 60 प्रतिशत डीए देने की योजना बना रही है, उनमें से कई कर्मचारियों ने अभी तीन साल की सेवा भी पूरी नहीं की है।
फिलहाल कर्मचारियों की कलम छोड़ हड़ताल और सामूहिक छुट्टी के कारण सरकारी दफ्तरों में कामकाज प्रभावित होने की संभावना है। अब सभी की नजरें कर्मचारी संगठनों की अगली रणनीति और सरकार की ओर से मांगों पर लिए जाने वाले फैसले पर टिकी हैं।

