मोहाली:-(मनदीप कौर)-डिजिटल युग में इंटरनेट और सोशल मीडिया का प्रभाव लगातार बढ़ता जा रहा है। पढ़ाई से लेकर मनोरंजन तक, बच्चे भी इसका बड़े पैमाने पर उपयोग कर रहे हैं। आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के दौर में इंटरनेट की उपयोगिता और भी बढ़ गई है, लेकिन इसके साथ जुड़े जोखिमों को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता।
इसी मुद्दे को ध्यान में रखते हुए सरकार ने स्कूली बच्चों के इंटरनेट और सोशल मीडिया उपयोग को लेकर एक विशेष कमेटी का गठन किया है। इस कमेटी में शिक्षा विशेषज्ञ, शिक्षक, शिक्षा विभाग और चाइल्ड वेलफेयर से जुड़े अधिकारी शामिल हैं। कमेटी का उद्देश्य यह समझना है कि इंटरनेट पर पाबंदियों का बच्चों के व्यवहार, पढ़ाई और मानसिक विकास पर क्या प्रभाव पड़ता है।
कमेटी उन राज्यों के डेटा का भी अध्ययन कर रही है, जहां बच्चों के इंटरनेट उपयोग पर कुछ सीमाएं लागू हैं। साथ ही उन क्षेत्रों का भी विश्लेषण किया जा रहा है, जहां ऐसी कोई पाबंदी नहीं है, ताकि दोनों स्थितियों के परिणामों की तुलना की जा सके।
कमेटी की रिपोर्ट के आधार पर सरकार यह तय करेगी कि स्कूली छात्रों के इंटरनेट और सोशल मीडिया उपयोग पर किस प्रकार की गाइडलाइन या नियम लागू किए जाएं। इस संबंध में शिक्षा मंत्री हरजोत सिंह बैंस ने चंडीगढ़ में आयोजित एक जागरूकता कार्यक्रम के दौरान जानकारी साझा की।
उन्होंने कहा कि मौजूदा नियमों के अनुसार 18 साल से कम उम्र के बच्चों को सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर अकाउंट बनाने की अनुमति नहीं है, लेकिन इसके बावजूद कई बच्चे इन प्लेटफॉर्म्स का उपयोग कर रहे हैं, जिसका उनके व्यवहार और पढ़ाई पर असर देखने को मिल रहा है।
सरकार का फोकस केवल पाबंदी लगाने पर नहीं, बल्कि बच्चों को सही दिशा देने पर भी है। इसी उद्देश्य से शिक्षा विभाग ने ‘बिजनेस ब्लास्टर प्रोजेक्ट’ शुरू किया है। इस योजना के तहत छात्रों को सीड मनी दी जा रही है, ताकि वे अपने बिजनेस आइडियाज पर काम कर सकें और भविष्य में स्टार्टअप की दिशा में आगे बढ़ सकें।
कॉलेज स्तर पर भी इस पहल को लागू किया जा रहा है, जहां छात्रों को उनके स्टार्टअप आइडियाज के आधार पर मूल्यांकन और क्रेडिट दिए जाएंगे। साथ ही, बेहतर आइडियाज को विकसित करने के लिए प्रोफेशनल मेंटर्स का सहयोग भी दिया जा रहा है।
निष्कर्ष:
बच्चों के इंटरनेट उपयोग को संतुलित और सुरक्षित बनाने के लिए सरकार का यह कदम अहम माना जा रहा है। आने वाले समय में कमेटी की रिपोर्ट के बाद नई गाइडलाइन लागू हो सकती हैं, जो शिक्षा और डिजिटल सुरक्षा दोनों को ध्यान में रखकर बनाई जाएंगी।

