चंडीगढ़ -(मनदीप कौर)- पंजाब में किसानों का आं aaदोलन लगातार जोर पकड़ रहा है। चंडीगढ़-मोहाली बॉर्डर पर संयुक्त किसान मोर्चा (SKM) का सात दिवसीय पक्का मोर्चा जारी है। प्रदर्शन के तीसरे दिन किसानों की संख्या बढ़ने के बाद अब आंदोलन आगे बढ़ने के संकेत भी मिल रहे हैं।
आज होगी अहम बैठक, तय होगी आगे की रणनीति

किसान नेताओं और प्रशासन के बीच बातचीत के बावजूद अभी तक प्रमुख मांगों पर कोई ठोस समाधान सामने नहीं आया है। किसान संगठनों ने आज सरकार के जवाब के आधार पर आगे की रणनीति तय करने की बात कही है।
SKM नेताओं के मुताबिक, अगर सरकार की ओर से उनकी मांगों को लेकर सकारात्मक पहल नहीं होती है तो आंदोलन को 7 सितंबर के बाद भी जारी रखा जा सकता है। पुलिस और प्रशासन भी किसानों के इस संभावित फैसले को लेकर सतर्क हैं।
चंडीगढ़-मोहाली बॉर्डर पर बढ़ी किसानों की भीड़
SKM का पक्का मोर्चा 1 सितंबर से चंडीगढ़-मोहाली बॉर्डर पर चल रहा है। रिपोर्ट के मुताबिक, तीसरे दिन प्रदर्शन स्थल पर करीब 5,500 किसान कार्यकर्ता और लगभग 700 ट्रैक्टर, पिकअप, बसें व ट्रक पहुंचे थे। प्रदर्शनकारियों के लिए लंगर और अन्य व्यवस्थाएं भी की गई हैं।
किसानों की प्रमुख मांगें क्या हैं
किसान संगठन कई अहम मुद्दों को लेकर सरकार पर दबाव बना रहे हैं। इनमें प्रमुख रूप से:
- सभी फसलों पर कानूनी MSP गारंटी
- किसानों और मजदूरों की कर्ज माफी
- पंजाब के नदी जल से जुड़े पुराने समझौतों की समीक्षा
- पंजाब की जमीन से जुड़ी लैंड पूलिंग नीति वापस लेने की मांग
- गन्ने का भाव ₹500 प्रति क्विंटल करने की मांग
किसानों और ग्रामीण मजदूरों के लिए ₹10,000 मासिक पेंशन - बिजली और बीज से जुड़े प्रस्तावित कानूनों का विरोध
- अमेरिका और यूरोप के साथ प्रस्तावित व्यापार समझौतों का विरोध
- सरकार की ओर से बातचीत का इंतजार
किसान नेताओं का कहना है कि वे बातचीत के लिए तैयार हैं, लेकिन सरकार को उनकी मांगों पर गंभीरता दिखानी होगी। वहीं, प्रशासन की ओर से आंदोलन के 7 सितंबर के बाद के स्वरूप को लेकर किसान नेताओं से संपर्क किया गया है।
अगर आज की बैठक के बाद सरकार की ओर से कोई ठोस आश्वासन नहीं मिलता है, तो पंजाब किसान मोर्चा और लंबा खिंच सकता है। इससे चंडीगढ़-मोहाली बॉर्डर पर यातायात और प्रशासनिक व्यवस्था पर भी असर पड़ने की संभावना है।
डिस्क्लेमर: यह खबर उपलब्ध मीडिया रिपोर्टों और किसान संगठनों के बयानों पर आधारित है। आंदोलन की आगे की रणनीति किसान नेताओं की बैठक और सरकार की प्रतिक्रिया के बाद स्पष्ट होगी।

