काठमांडू: नेपाल में 26 अगस्त को आई विनाशकारी बाढ़ ने भारी तबाही मचा दी है। ताजा आधिकारिक आंकड़ों के मुताबिक बाढ़ और भूस्खलन की इस त्रासदी में अब तक 1,204 लोगों की मौत हो चुकी है, जबकि 4,216 लोग अभी भी लापता हैं। राहत और बचाव अभियान लगातार जारी है।

900 से ज्यादा हाइड्रोपावर कर्मचारी लापता
सबसे बड़ी चिंता उन लोगों को लेकर है जो हाइड्रोपावर प्रोजेक्ट्स की सुरंगों में फंसे होने की आशंका है। करीब 900 हाइड्रोपावर कर्मचारी अभी भी लापता बताए जा रहे हैं। बचाव दल सुरंगों तक पहुंचने की कोशिश कर रहे हैं और कुछ जगहों पर संभावित सुरक्षित हिस्सों में ऑक्सीजन पहुंचाई जा रही है।
ग्लेशियर और चट्टानों के खिसकने से आई तबाही
रिपोर्टों के अनुसार, नेपाल-चीन सीमा के पास हिमालयी क्षेत्र में बर्फ और चट्टानों के बड़े हिस्से के खिसकने से पानी का जबरदस्त बहाव पैदा हुआ। इससे नदियों का जलस्तर अचानक बढ़ गया और कई इलाकों में बाढ़, मलबे और भूस्खलन ने भारी तबाही मचाई।
21 हजार से ज्यादा सुरक्षाकर्मी राहत अभियान में
नेपाल सरकार ने बड़े पैमाने पर राहत और बचाव अभियान शुरू किया है। ताजा आंकड़ों के अनुसार 21,314 सुरक्षाकर्मी सर्च और रेस्क्यू ऑपरेशन में लगाए गए हैं। अब तक हजारों लोगों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाया जा चुका है।
भारत भी कर रहा मदद
नेपाल में फंसे लोगों को बचाने के लिए भारत ने भी विशेष राहत और बचाव सहायता भेजी है। भारतीय टीमें हाइड्रोपावर सुरंगों में फंसे लोगों तक पहुंचने के लिए विशेष अभियान चला रही हैं। भारत ने राहत सामग्री और विशेषज्ञ टीमें भी भेजी हैं।
लापता लोगों के परिवारों की बढ़ी चिंता
हजारों लोगों के अब तक लापता होने के कारण उनके परिवारों में चिंता बढ़ती जा रही है। कई इलाकों में शवों की पहचान के लिए DNA सैंपल लिए जा रहे हैं और कुछ अज्ञात शवों को अस्थायी रूप से दफनाया गया है।
नेपाल में बचाव अभियान अभी भी जारी है और सुरंगों तथा दुर्गम पहाड़ी इलाकों में फंसे लोगों को बाहर निकालना राहत एजेंसियों के लिए सबसे बड़ी चुनौती बनी हुई है।
नोट: आंकड़े नेपाल की आपदा प्रबंधन एजेंसी और ताजा मीडिया रिपोर्टों के आधार पर हैं। राहत एवं बचाव अभियान जारी रहने के कारण मृतकों और लापता लोगों की संख्या में बदलाव हो सकता है।

