नई दिल्ली: जंतर-मंतर पर कई दिनों से जारी CJP (कॉकक्रोच जनता पार्टी) का बड़ा आंदोलन आखिरकार समाप्त हो गया। सरकार और CJP के बीच तीन दौर की लंबी बातचीत के बाद दोनों पक्षों ने संयुक्त प्रेस कॉन्फ्रेंस कर समझौते की घोषणा की। इसके बाद CJP ने अपना धरना-प्रदर्शन वापस लेने का ऐलान कर दिया।
CJP का कहना है कि उनकी सबसे बड़ी मांग पूरी हो गई है और शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने अपने पद से इस्तीफा दे दिया है। इसके अलावा सरकार ने प्रदर्शनकारियों के खिलाफ दर्ज सभी मामलों को वापस लेने पर सहमति जताई है। साथ ही भविष्य में आंदोलन से जुड़े लोगों के खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं करने का आश्वासन भी दिया गया है।
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CJP के राष्ट्रीय प्रवक्ता आशुतोष रंका ने बताया कि संगठन की तीन प्रमुख मांगें थीं। पहली शिक्षा मंत्री का इस्तीफा, दूसरी दिल्ली और भाजपा शासित राज्यों में दर्ज एफआईआर की वापसी और तीसरी आंदोलनकारियों के खिलाफ आगे कोई कार्रवाई न करने की गारंटी। सरकार ने इन मांगों पर सहमति जताते हुए जल्द लिखित दस्तावेज साझा करने का भरोसा दिया है।
नीट पीड़ित परिवारों के लिए CJP ने 1 करोड़ रुपये के मुआवजे की मांग रखी थी। सरकार ने नियमों के अनुसार सम्मानजनक मुआवजा देने का आश्वासन दिया है। इसके साथ ही CJP ने परीक्षा प्रणाली और शिक्षा व्यवस्था में सुधार से जुड़ा 5 सूत्रीय चार्टर भी सरकार को सौंपा है। इस चार्टर पर विस्तृत चर्चा के लिए दोनों पक्ष अगले कुछ सप्ताह में फिर बैठक करेंगे।
सरकार की ओर से मिले आश्वासनों के बाद भाजपा अध्यक्ष जेपी नड्डा ने प्रदर्शनकारियों से आंदोलन समाप्त करने की अपील की। इसके बाद CJP के मुख्य प्रवक्ता सौरभ दास ने औपचारिक रूप से आंदोलन वापस लेने की घोषणा करते हुए उम्मीद जताई कि तय समय सीमा के भीतर सभी सहमत बिंदुओं पर अमल किया जाएगा।

