लुधियाना -(मनदीप कौर)-पंजाब में साइबर ठगी का एक नया मामला सामने आया है। साइबर ठगों ने पंजाब पुलिस के रिटायर्ड एसीपी गुरदेव सिंह की तस्वीर का कथित तौर पर गलत इस्तेमाल करते हुए फर्जी सोशल मीडिया प्रोफाइल और डीपी तैयार की है। इस फर्जी पहचान के जरिए लोगों को अपने जाल में फंसाने की कोशिश की जा रही है।
मामले की जानकारी मिलने के बाद रिटायर्ड एसीपी गुरदेव सिंह ने खुद सोशल मीडिया के माध्यम से लोगों को अलर्ट किया। उन्होंने अपने आधिकारिक फेसबुक अकाउंट पर पोस्ट शेयर कर परिचितों और आम लोगों से अपील की कि फर्जी प्रोफाइल से आने वाले किसी भी मैसेज या कॉल पर भरोसा न करें और किसी तरह का पैसों का लेन-देन न करें।

फर्जी डीपी लगाकर लोगों को बनाया जा सकता है निशाना
जानकारी के अनुसार, साइबर ठगों ने गुरदेव सिंह की तस्वीर को अपनी सोशल मीडिया या व्हाट्सऐप डीपी के रूप में इस्तेमाल किया है। ऐसे मामलों में ठग अक्सर किसी पुलिस अधिकारी या अन्य प्रतिष्ठित व्यक्ति की तस्वीर लगाकर लोगों पर भरोसा कायम करने की कोशिश करते हैं।
इसके बाद वे इमरजेंसी, पुलिस कार्रवाई या किसी अन्य बहाने से पैसे की मांग कर सकते हैं। यही वजह है कि सोशल मीडिया पर किसी परिचित या अधिकारी की तस्वीर देखकर तुरंत विश्वास करने के बजाय उसकी पहचान की पुष्टि करना जरूरी है।
रिटायर्ड ACP ने खुद किया अलर्ट
फर्जी प्रोफाइल की जानकारी मिलने पर गुरदेव सिंह ने अपने आधिकारिक फेसबुक अकाउंट से लोगों को सावधान किया। उन्होंने स्पष्ट किया कि उनकी तस्वीर का इस्तेमाल करने वाला व्यक्ति फर्जी है और उसके किसी भी संदेश या कॉल का जवाब नहीं दिया जाना चाहिए।
उन्होंने लोगों से किसी भी तरह का वित्तीय लेन-देन करने से पहले संबंधित व्यक्ति से फोन पर सीधे संपर्क कर पूरी जानकारी की पुष्टि करने की अपील की।
साइबर ठगी से बचने के लिए क्या करें?
साइबर विशेषज्ञों के अनुसार, अगर किसी व्हाट्सऐप नंबर या सोशल मीडिया प्रोफाइल से अचानक पैसे मांगे जाएं, तो बिना सत्यापन के कोई भुगतान नहीं करना चाहिए। खासकर पुलिस अधिकारी, सरकारी कर्मचारी या किसी परिचित की फोटो लगी प्रोफाइल देखकर भी तुरंत भरोसा नहीं करना चाहिए।
अगर कोई संदिग्ध प्रोफाइल या नंबर ठगी की कोशिश करता है, तो इसकी शिकायत साइबर क्राइम हेल्पलाइन 1930 या स्थानीय पुलिस को की जा सकती है।
ऐसे मामलों में सबसे जरूरी बात यही है कि प्रोफाइल फोटो देखकर भरोसा न करें, पहचान की पुष्टि करें और संदिग्ध व्यक्ति को कोई OTP, बैंक डिटेल या पैसे न भेजें।

