मोहाली -(मनदीप कौर)- पंजाब में 27 अगस्त को प्रस्तावित कर्मचारियों की हड़ताल को लेकर सरकार ने सख्त रुख अपना लिया है। सरकारी सूत्रों के अनुसार, हड़ताल में शामिल होने वाले कर्मचारियों की सूची तैयार की गई है और बिना उचित कारण ड्यूटी से अनुपस्थित रहने वालों पर कार्रवाई की तैयारी है।
बताया जा रहा है कि करीब 2,500 कर्मचारियों के हड़ताल में शामिल होने की जानकारी सरकार के पास है। वहीं, 27 अगस्त को कुल 2,564 कर्मचारी गैरहाजिर पाए जाने की बात भी सामने आई है। सरकार अब गैरहाजिरी के कारणों की जांच कर संबंधित कर्मचारियों के खिलाफ सेवा नियमों के तहत कार्रवाई कर सकती है।

मुख्यमंत्री की बैठक से पहले बदला घटनाक्रम
जालंधर में कर्मचारियों के साथ बैठक से करीब एक घंटे पहले मुख्यमंत्री भगवंत मान ने स्पष्ट किया था कि पहले हड़ताल खत्म की जाए और उसके बाद कर्मचारियों के साथ बातचीत की जाएगी।
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इसके बाद कर्मचारी नेता पीपीपी कॉम्प्लेक्स पहुंचे, लेकिन मुख्यमंत्री के साथ प्रस्तावित बैठक नहीं हो सकी। अधिकारियों की ओर से कर्मचारियों से पहले हड़ताल खत्म करने की घोषणा करने को कहा गया। जब कर्मचारी इस पर सहमत नहीं हुए तो बैठक रद्द कर दी गई।
गैरहाजिर कर्मचारियों पर हो सकती है कार्रवाई
सरकार की ओर से सभी विभागों के सचिवों को पत्र जारी कर उन कर्मचारियों की सूची भेजने के लिए कहा गया है, जो बिना किसी उचित कारण के ड्यूटी से अनुपस्थित रहे।
इन कर्मचारियों के खिलाफ निलंबन, जबरन छुट्टी, वेतन कटौती या सेवा नियमों के तहत अन्य कार्रवाई की जा सकती है। सरकार की नजर अब उन कर्मचारियों पर है, जिन्होंने हड़ताल में हिस्सा लिया या ड्यूटी से गैरहाजिर रहे।
कर्मचारियों ने भी सरकार के सामने रखा पक्ष
दूसरी ओर कर्मचारी संगठन भी अपने रुख पर कायम हैं। कर्मचारियों का कहना है कि वे अपनी मांगों को लेकर आंदोलन कर रहे हैं। उनकी प्रमुख मांगों में लंबित डीए का भुगतान, पुरानी पेंशन योजना लागू करना और अस्थायी कर्मचारियों को नियमित करना शामिल है।
कर्मचारी नेताओं की अगली बैठक लुधियाना में होने की बात सामने आई है। ऐसे में आने वाले दिनों में सरकार और कर्मचारियों के बीच टकराव बढ़ता है या बातचीत के जरिए कोई समाधान निकलता है, इस पर सभी की नजर बनी हुई है।

