पंजाब -(मनदीप कौर)- पंजाब की राजनीति में सोमवार को उस समय बड़ा सियासी धमाका देखने को मिला, जब शिरोमणि अकाली दल (पुनर सुरजीत) के 15 से अधिक वरिष्ठ नेताओं ने पार्टी नेतृत्व के खिलाफ खुला मोर्चा खोलते हुए अलग गुट बनाने का ऐलान कर दिया। इस नए गुट की कमान वरिष्ठ नेता इकबाल सिंह झूंदा ने संभाली है। सबसे अहम बात यह रही कि बागी नेताओं ने खडूर साहिब से सांसद अमृतपाल सिंह की पार्टी “वारिस पंजाब दे” को अपना खुला समर्थन देने की घोषणा भी कर दी।
अमृतपाल सिंह के पिता भी रहे मौजूद
इस अहम बैठक में अमृतपाल सिंह के पिता तरसेम सिंह सहित कई प्रमुख नेता मौजूद रहे। मंच से नेताओं ने कहा कि संगठन उन्हें जो भी जिम्मेदारी देगा, वे पूरी ईमानदारी और समर्पण के साथ निभाएंगे। उनका उद्देश्य पंजाब, पंथ और किसानों के हितों की रक्षा करना है और इसी मिशन के साथ वे आगे बढ़ेंगे।
झूंदा बोले- सरकार नई जनलहर से घबराई हुई है
इकबाल सिंह झूंदा ने सरकार पर गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि मौजूदा शासनकाल में भी कई मामलों के दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई नहीं हुई, जबकि कई आरोपी जेलों से बाहर आ चुके हैं। उन्होंने दावा किया कि अमृतपाल सिंह को जेल में इसलिए रखा जा रहा है क्योंकि सरकार एक नई जनलहर के उभरने से डर रही है।
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झूंदा ने यह भी कहा कि अमृतपाल सिंह पर लगाया गया एनएसए हटाया जा चुका है और अब उन्हें संसद या संबंधित सत्र में शामिल होने का अवसर दिया जाना चाहिए, ताकि वे जनता द्वारा चुने गए सांसद के रूप में अपनी संवैधानिक जिम्मेदारियां निभा सकें।
पंजाब की राजनीति में बढ़ेगी हलचल?
15 से ज्यादा नेताओं के एक साथ अलग होने और “वारिस पंजाब दे” के समर्थन में आने से पंजाब की सियासत में नई हलचल तेज हो गई है। राजनीतिक जानकारों का मानना है कि आने वाले दिनों में यह घटनाक्रम राज्य की राजनीति पर बड़ा असर डाल सकता है।

