पंजाब -(मनदीप कौर)- पंजाब में सरकारी कर्मचारियों और राज्य सरकार के बीच टकराव बढ़ता जा रहा है। कर्मचारियों के लगातार विरोध प्रदर्शन के बीच पंजाब सरकार ने ‘No Work, No Pay’ नीति लागू करने का फैसला किया है। वहीं कर्मचारी संगठनों ने अपना pen-down protest 11 सितंबर तक जारी रखने का ऐलान किया है।
DA समेत कई मांगों को लेकर प्रदर्शन

कर्मचारी लंबे समय से लंबित Dearness Allowance (DA) और Dearness Relief (DR) के भुगतान, Old Pension Scheme (OPS) और अन्य सेवा संबंधी मांगों को लेकर आंदोलन कर रहे हैं। 8 सितंबर को पंजाब के कई सरकारी कार्यालयों में ministerial staff ने काम का बहिष्कार किया और pen-down strike की।
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रिपोर्टों के मुताबिक कर्मचारियों की मुख्य मांगों में लंबित DA arrears का भुगतान भी शामिल है। कर्मचारियों का कहना है कि सरकार की ओर से पहले कई बार आश्वासन दिए गए, लेकिन उनकी मांगों पर ठोस समाधान नहीं हुआ।
सरकार ने क्यों लिया ‘No Work No Pay’ का फैसला?
सरकार की ओर से कहा गया है कि कुछ कर्मचारी कार्यालय में हाजिरी लगाने के बाद ड्यूटी से अनुपस्थित रह रहे हैं। Personnel Department ने ऐसे मामलों को unauthorised absence माना है।
सरकारी निर्देशों के अनुसार ऐसी अनुपस्थिति की अवधि के लिए कर्मचारियों को वेतन नहीं मिलेगा और जरूरत पड़ने पर disciplinary action भी लिया जा सकता है।
11 सितंबर तक जारी रहेगा आंदोलन
कर्मचारी संगठनों और सरकार के बीच बातचीत से कोई समाधान नहीं निकल सका। इसके बाद ministerial employees ने अपना आंदोलन शुक्रवार, 11 सितंबर तक बढ़ाने का फैसला किया है।
इस बीच सरकार ने कर्मचारियों से काम पर लौटने की अपील की है और कहा है कि लोगों को सरकारी सेवाओं में परेशानी नहीं होनी चाहिए।
सरकारी दफ्तरों के काम पर असर
हड़ताल के कारण Chandigarh, Mohali और Punjab के कई जिलों में सरकारी कार्यालयों का काम प्रभावित हुआ। हालांकि बस सेवाएं, स्कूल और स्वास्थ्य संस्थान सामान्य रूप से खुले रहे, जबकि संबंधित ministerial staff के विरोध के कारण प्रशासनिक काम प्रभावित हुआ।
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