नई दिल्ली:-(Mandeep kaur)- पैकेट में मिलने वाले खाद्य पदार्थों में ज्यादा नमक, चीनी और फैट की मात्रा को लेकर सुप्रीम कोर्ट ने सख्त रुख अपनाया है। अदालत ने इस मुद्दे को लोगों की सेहत, खासकर बढ़ते बच्चों के स्वास्थ्य से जुड़ा गंभीर मामला बताते हुए इसे राष्ट्रीय हित में देखने की बात कही है।
जस्टिस जे.बी. पारदीवाला और जस्टिस के. विनोद चंद्रन की पीठ ने मामले की सुनवाई के दौरान कहा कि कोर्ट इस विषय पर विस्तृत आदेश जारी करेगी और संबंधित सभी पक्षों से जरूरी जानकारी ली जाएगी। मामले की अगली सुनवाई 28 सितंबर 2026 को होगी।

पैकेट पर Warning Label को लेकर सवाल
सुप्रीम कोर्ट ने खाद्य नियामक FSSAI से यह स्पष्ट करने को कहा कि किसी पैकेट वाले खाद्य उत्पाद को नमक, चीनी या फैट की मात्रा के आधार पर ‘High’ मानने का वैज्ञानिक और मात्रात्मक आधार क्या है। कोर्ट ने यह भी सवाल उठाया कि क्या इसके लिए स्पष्ट सीमा तय की गई है।
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मामला ‘3S and Our Health Society’ की याचिका से जुड़ा है। याचिकाकर्ता का तर्क है कि यदि किसी खाद्य उत्पाद में इन तीन में से किसी एक पोषक तत्व की मात्रा भी अत्यधिक है, तो उस पर उपभोक्ताओं को स्पष्ट चेतावनी मिलनी चाहिए।
FSSAI ने बदला अपना रुख
इससे पहले FSSAI ने ऐसे पैकेट वाले खाद्य पदार्थों के लिए Front-of-Pack Warning Label (FoPL) का प्रस्ताव रखा था, जिनमें तय सीमा से ज्यादा नमक, चीनी और सैचुरेटेड फैट हो। शुरुआती प्रस्ताव में दो या उससे अधिक पोषक तत्वों के अधिक होने पर चेतावनी देने की बात थी।
अब सुप्रीम कोर्ट के सवालों के बाद FSSAI ने कहा है कि वह इनमें से किसी एक पोषक तत्व की मात्रा अधिक होने पर भी चेतावनी लेबल लागू करने के विकल्प पर विचार करेगा।
लाल Warning Label पर भी चर्चा
FSSAI ने पैकेट के सामने लाल रंग के हेक्सागोन आकार में चेतावनी देने का प्रस्ताव रखा है, ताकि ग्राहक उत्पाद में मौजूद अधिक नमक, चीनी या फैट को आसानी से पहचान सकें। कोर्ट के सामने इस लेबल के डिजाइन और पोषक तत्वों की सीमा तय करने के वैज्ञानिक आधार पर भी चर्चा हुई।
अदालत ने सभी पक्षों को आने वाले विस्तृत आदेश का अध्ययन करने को कहा है। अब इस मामले में 28 सितंबर की सुनवाई महत्वपूर्ण होगी, जहां पैकेज्ड फूड पर चेतावनी लेबल की व्यवस्था को लेकर आगे की दिशा स्पष्ट हो सकती है।

