जालंधर -(मनदीप कौर )- पंजाब सरकार ने मुख्यमंत्री सेहत बीमा योजना में कथित अनियमितताओं और गड़बड़ियों को लेकर बड़ा प्रशासनिक कदम उठाया है। स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्री डॉ. बलबीर सिंह ने प्रेस कॉन्फ्रेंस में बताया कि सरकारी स्वास्थ्य योजनाओं में भ्रष्टाचार, फर्जीवाड़ा या किसी भी प्रकार की अनियमितता करने वाले अस्पतालों और संस्थानों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी।
स्वास्थ्य मंत्री ने बताया कि जांच के दौरान मुख्यमंत्री सेहत बीमा योजना में शामिल 14 अस्पतालों में अनियमितताएं सामने आईं। इनमें जालंधर का सर्वोदय अस्पताल भी शामिल है, जिसे योजना की सूची से बाहर कर दिया गया है। सरकार का कहना है कि सरकारी धन का दुरुपयोग किसी भी कीमत पर बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।
50 लाख से अधिक लोगों को मिला योजना का लाभ
सरकार के अनुसार अब तक 50.30 लाख लोगों को ₹10 लाख तक का हेल्थ कार्ड जारी किया जा चुका है। वहीं 5.12 लाख से अधिक मरीजों ने कैशलेस इलाज का लाभ उठाया है, जिसके तहत अब तक लगभग ₹914 करोड़ की उपचार सहायता प्रदान की गई है।
डॉ. बलबीर सिंह ने बताया कि मुख्यमंत्री सेहत योजना के अंतर्गत 733 कैंसर मरीजों को भी निशुल्क उपचार उपलब्ध कराया गया है। उन्होंने कहा कि समय पर इलाज मिलने से लोगों को आर्थिक राहत मिली है और इलाज के लिए कर्ज लेने जैसी स्थिति से भी बचाव हुआ है।
महिलाओं और ग्रामीण क्षेत्रों को सबसे अधिक लाभ
सरकार द्वारा साझा किए गए आंकड़ों के अनुसार योजना के लाभार्थियों में 52 प्रतिशत महिलाएं हैं, जबकि 68 प्रतिशत लाभार्थी ग्रामीण क्षेत्रों से हैं। सरकार का दावा है कि स्वास्थ्य सेवाओं में पारदर्शिता बनाए रखना उसकी सर्वोच्च प्राथमिकता है।
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फर्जी बिलिंग और अवैध वसूली पर सख्त कार्रवाई
स्वास्थ्य मंत्री ने कहा कि जांच के दौरान कुछ अस्पतालों द्वारा मुफ्त इलाज के बावजूद मरीजों से पैसे वसूलने और फर्जी मरीज दिखाकर सरकारी योजना में भुगतान लेने जैसी शिकायतें सामने आई हैं। ऐसे मामलों में संबंधित संस्थानों के खिलाफ कार्रवाई शुरू कर दी गई है।
उन्होंने बताया कि 6 मरीजों के परिवारों से कथित रूप से वसूली गई राशि वापस कराई गई, जबकि अनियमितता पाए जाने पर 14 अस्पतालों पर कुल ₹78.67 लाख का जुर्माना लगाया गया है। सरकार ने स्पष्ट किया कि भविष्य में भी स्वास्थ्य योजनाओं में गड़बड़ी करने वालों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई जारी रहेगी।

